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Tuesday, 11 August 2020
Monday, 27 July 2020
उपभोक्ता व्यवहार सिद्धांत
◆ उपभोक्ता व्यवहार सिद्धांत
वह सिद्धांत है जिसमें उपभोक्ता द्वारा वस्तुओं तथा सेवाओं के उपयोग के प्रति व्यवहार को दर्शाया जाता है
जिसमें उपभोक्ता वस्तुओं तथा सेवाओं से प्राप्त होने वाली उपयोगिता की तुलना करता है तथा अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने का प्रयास करता है
◆ उपयोगिता
किसी वस्तु या सेवा के उपभोग से प्राप्त होने वाली संतुष्टि के माप को उपयोगिता कहते हैं
◆ उपयोगिता को मापने के दृष्टिकोण
(1) गणनावाचक
(2) क्रमवाचक
◆ उपयोगिता के प्रकार
1 ) कुल उपयोगिता
किसी वस्तु की विभिन्न इकाइयों का प्रयोग करने से प्राप्त होने वाली उपयोगिता के कुल जोड़ को कुल उपयोगिता कहते हैं
2 ) सीमांत उपयोगिता
किसी वस्तु की एक अधिक या कम इकाई का उपभोग करने पर कुल उपयोगिता में
जो अंतर आता है। उसे सीमांत उपयोगिता कहते हैं
MR = TUn - TUn-1
◆ कुल उपयोगिता और सीमांत उपयोगिता में संबंध
◆ सीमांत उपयोगिता का हास नियम
सीमांत उपयोगिता का हास नियम यह दर्शाता है कि किसी वस्तु या सेवा की अधिक इकाई का प्रयोग करने पर उससे प्राप्त होने वाली सीमांत उपयोगिता घटती जाती है ,
इसे फ्रेंच अर्थशास्त्री हरमैन हेनरिक गोसेन के नाम पर गोसेन का प्रथम नियम कहा जाता है
◆ सम सीमांत उपयोगिता का हास नियम
उपयोगिता विश्लेषण में उपभोक्ता का संतुलन " सम सीमांत उपयोगिता नियम " द्वारा स्पष्ट किया जाता है
जिसे गोसेन का दूसरा नियम कहा जाता है इसमें वस्तु की अतिरिक्त इकाई का प्रयोग करने पर वस्तु से मिलने वाली उपयोगिता उस पर खर्च की गई मुद्रा की अंतिम इकाई के बराबर होती है
MUx. MUy. MUz
------ = ------- = ------
Px. Py. Pz
◆ सीमांत प्रतिस्थापन दर
एक वस्तु की अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने के लिए दूसरी का त्याग करना होता है जो सीमांत प्रतिस्थापन दर कहलाती है
◆ कीमत रेखा या बजट रेखा
दो वस्तुओं के ऐसे संयोजनो को प्रकट करती है जो उपभोक्ता अपनी सीमित आय व वस्तुओं की कीमतों के आधार पर खरीद सकता है
◆ अनधिमान वक्र/ उदासीनता वक्र विश्लेषण
जे.आर.हिक्स द्वारा अपनी पुस्तक " वैल्यू ऑफ कैपिटल " में दिया गया है ! यह विचार बताता है कि उपयोगिता को मापा नहीं जा सकता , किंतु उयोगिता को एक वरीयता क्रम में रखा जा सकता है
--> इस क्रमवाचक विचार का प्रारंभ वर्ष 1881 में एजवर्थ की पुस्तक मैथमेटिकल फिजिक्स हुआ
--> अनधिमान वक्र/ उदासीनता वक्र विश्लेषण दो वस्तुओं के उन संयोजनो को दर्शाता है जो उपभोक्ता को सम्मान संतुष्टि प्रदान करते हैं
--> मान्यता
1) सीमित आय , दो वस्तुएं
2) स्थिर कीमत
3) आय , रुचि में कोई परिवर्तन नही
--> विशेषताएँ
1) ढाल बाएं से दाएं नीचे की ओर
2) मूल बिंदु की ओर उत्तल होता है
3) ऊंचा IC संतुष्टि का ऊंचा स्तर प्रकट करता है
4) दो IC एक दूसरे को नहीं काटते
◆ उपभोक्ता
उपभोक्ता वह आर्थिक एजेंट होता है जो अपनी आवश्यकताओं की प्रत्यक्ष संतुष्टि के लिए वस्तु व सेवाओं का उपभोग व उपयोग करता है
◆ उपभोक्ता संतुलन
उपभोक्ता संतुलन वह स्थिति है जिसमें एक उपभोक्ता अपनी आय को विभिन्न वस्तुओं पर इस प्रकार खर्च करता हैं कि उसे अधिकतम संतुष्टि प्राप्त होती है
--> वह अपने आपको वर्तमान परिस्थितियों में सबसे अच्छा मानता है तथा कोई परिवर्तन पसंद नहीं करता !
1) जब उपभोक्ता केवल एक ही वस्तु का उपभोग करता है
2) जब बता दो या दो से अधिक वस्तुओं का प्रयोग करता है
Sunday, 26 July 2020
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय अर्थव्यवस्था
◆ भारतीय अर्थव्यवस्था का परिचय :-
--> भारत में ब्रिटिश शासन स्थापित होने से पहले यहां की स्थिति काफी अच्छी थी ,
● यह देश अनाज के संबंध में आत्मनिर्भर था
यहां अनेक प्रकार के उद्योग जैसे छोटे पैमाने के उद्योग की स्थिति काफी अच्छी थी
● दूर-दूर तक इनके बाजारों का विस्तार हुआ
● परिवहन के क्षेत्र में भी देश उन्नत था
● व्यापार की स्थिति भी काफी अच्छी थी
● ब्रिटिश शासन से पूर्व यहां की अर्थव्यवस्था का स्तर काफी ऊंचा था इसमें पर्याप्त संतुलन भी था
लेकिन ब्रिटिश शासन स्थापित होने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी अर्थव्यवस्था चरमरा गई तथा देश आर्थिक दृष्टि से पिछड़ाता चला गया
◆ इस औपनिवेशिक शोषण को तीन चरणों में बांटा जा सकता है
1) पहला चरण :- यह चरण व्यापारिक पूंजी तथा औपनिवेशिक शोषण से संबंधित था
2) दूसरा चरण :- यह चरण औद्योगिक पूंजी व औपनिवेशिक शोषण से संबंधित था
3) तीसरा चरण :- यह चरण महाजनी पूंजी तथा औपनिवेशिक शोषण से संबंधित था
◆ --> भारतीय अर्थव्यवस्था पिछड़े होने के कारण
1) परंपरागत कृषि
2) बड़े स्तर पर पाए जाने वाली अशिक्षा
3) कमजोर आधारभूत ढांचा
4) सामाजिक सूचकांक मापदंडों का निचला स्तर
5) उच्च शिशु मृत्यु दर
6) भारतीय संपत्ति का बड़ी मात्रा में निष्कासन
7) हस्तशिल्प का विनाश
8) राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय का निम्न स्तर
9) पिछड़ा हुआ उद्योग या सेवा क्षेत्र
10) जनसंख्या वृद्धि
11) बड़े स्तर पर गरीबी व बेरोजगारी
12) पिछड़ी व पुरानी तकनीक
◆ अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण अवधारणाएं :-
1) पिछड़ी अर्थव्यवस्था
2) विकासशील अर्थव्यवस्था
3) विकसित अर्थव्यवस्था
4) गति हीन अर्थव्यवस्था
5) कंपायमानअर्थव्यवस्था
◆ स्वतंत्रता प्राप्ति के समय कृषि क्षेत्र 1947
1) निम्न उत्पादकता :- उत्पादकता का स्तर बहुत ही निम्न था
निम्न उत्पादकता का अर्थ है / उत्पादन का निम्न स्तर जबकि भूमि के बहुत बड़े क्षेत्र पर कृषि की जाती थी
2) उच्च संवेदनशीलता :- कृषि में अधिक संवेदनशीलता पाई जाती है क्योंकि इसकी वर्षा पर निर्भरता बहुत अधिक होती है
3) छोटी और खंडित जोत :- जोतें छोटी तथा खंडित थी अधिकांश जोतें अनार्थिक थी जिन पर उच्च लागत पर कम उपज होती थी
4) भूमि के स्वामी तथा उसे जोतने वाले किसान के बीच चौड़ी खाई :-ब्रिटिश शासन के दौरान कृषि की एक विशेषता यह भी थी कि भूमि के स्वामी तथा भूमि पर खेती करने वाले किसानों के बीच खाई निरंतर चौड़ी होती जा रही थी
◆ ब्रिटिश शासन काल के दौरान भारतीय कृषि के पिछड़ेपन तथा गतिहीनता के महत्वपूर्ण कारक :-
1) ब्रिटिश राज में भू राजस्व प्रणाली
2) कृषि का व्यापारीकरण
3) पुरानी एव पिछड़ी तकनीक
◆ स्वतंत्रता प्राप्ति के समय औद्योगिक क्षेत्र
1) राज्य की विभेदमूलक कर नीति :- इस नीति के अंतर्गत बिना निर्यात शुल्क के भारत से कच्चा माल का निर्यात तथा बिना आयात शुल्क के ब्रिटिश औद्योगिक उत्पाद का भारत में आयात किया गया। परंतु भारतीय हस्तशिल्प उत्पाद के निर्यात पर भारी शुल्क लगाए गए
2) भारतीय हस्तशिल्प उद्योगों का पतन :- ब्रिटिश शासन ने अपने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की नीति अपनाई की भारतीय हस्तशिल्प उद्योगों का पतन हुआ तथा वे पूरी तरह नष्ट कर दिया
3) उद्योगों का निराशाजनक प्रदर्शन :- उस समय उद्योगों का प्रदर्शन काफी खराब रहा
◆ ब्रिटिश शासन के अंतर्गत विदेशी व्यापार
1) प्राथमिक उत्पादों का शुद्ध निर्यातक :- भारत कच्चे माल तथा प्राथमिक वस्तुओं जैसे कच्चा रेशम , कपास , नील , ऊन ,चीनी इत्यादि का शुद्ध निर्यातक बन गया
2) व्यापार में आधिक्य परंतु अंग्रेजों के लाभ के लिए :- स्वतंत्रता प्राप्ति के समय में व्यापार में आधिक्य तो हुआ लेकिन केवल उसका अंग्रेज को लाभ हुआ
3) भारत के विदेशी व्यापार का एक अधिकारी नियंत्रण :- अंग्रेजों ने भारत के विदेशी व्यापार नीति की रचना इस प्रकार की कि केवल अंग्रेजों को ही उससे लाभ हुआ
◆ ब्रिटिश शासन के दौरान जनांकिकीय रूपरेखा
1) जन्म दर तथा मृत्यु दर :- जन्म दर तथा मृत्यु दर दोनों ही बहुत उच्च थे लगभग 48 तथा 40 प्रति हजार थे
2) शिशु मृत्यु दर :- एक वर्ष से कम आयु वाले बच्चों की मृत्यु दर बहुत ऊंची थी यह लगभग 218 प्रति हजार थी
3) साक्षरता दर :- वह लोग जो लिख तथा पढ़ सकते हैं लगभग 16% थी यह भी सामाजिक तथा आर्थिक पिछड़ेपन की निशानी है जिसमें से स्त्री साक्षरता दर केवल 7% थी
◆ स्वतंत्रता प्राप्ति के समय व्यावसायिक ढांचा
◆ स्वतंत्रता प्राप्ति के समय आधारिक संरचना
1) आर्थिक परिवर्तन :- जैसे यातायात साधन,संचार,बैंकिंग,शक्ति,ऊर्जा
2) सामाजिक परिवर्तन :- जैसे शिक्षा,स्वास्थ्य तथा आवास सुविधाओं का विकास
◆ भारत में ब्रिटिश शासन के कुछ धनात्मक पक्ष - प्रभाव
1) यातायात सुविधा का विकास
2) बंदरगाहों का विकास
3) डाक तथा टेलीग्राफ सेवा का विकास
Saturday, 25 July 2020
अर्थशास्त्र एवं अर्थव्यवस्था
◆ अर्थशास्त्र : -
अर्थशास्त्र वह शास्त्र है जो मनुष्य की धन संबंधी आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन करता है
● अर्थशास्त्र का सार
(१) दुर्लभता
(२) चुनाव
◆ व्यष्टि अर्थशास्त्र : -
व्यष्टि अर्थशास्त्र , अर्थशास्त्र की वह शाखा है जिसमें आर्थिक समस्याओं तथा आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन व्यक्तिगत अथवा छोटे स्तर पर किया जाता है।
◆ समष्टि अर्थशास्त्र : -
समष्टि अर्थशास्त्र , अर्थशास्त्र की वह शाखा है जिसमें आर्थिक समस्याओं तथा आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन संपूर्ण अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण के आधार पर किया जाता है।
● व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र के बीच अंतर
◆ वास्तविक अर्थशास्त्र : -
वास्तविक अर्थशास्त्र यह उन आर्थिक स्थितियों से संबंधित है जिनका तथ्यों तथा आंकड़ों द्वारा अध्यन किया जाता है।
◆ आदर्शात्मक अर्थशास्त्र :-
उन आर्थिक मुद्दों के अध्ययन से संबंधित है जिसमें कथन मूल्यांकन निहित होते हैं तथा इस पर वाद विवाद किया जा सकता है
● वास्तविक अर्थशास्त्र और आदर्शात्मक अर्थशास्त्र के बीच अंतर
◆ अर्थव्यवस्था : -
अर्थव्यवस्था एक प्रणाली है जो मानव को अपनी आजीविका कमाने के लिए दुर्लभ संसाधन प्रदान करती है
◆ अर्थव्यवस्था का प्रकार
(1) बाजार अर्थव्यवस्था : -
इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में, निजी उपक्रम के लिए आर्थिक गतिविधियां स्वतंत्र हैं, सरकार का कोई प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। इस अर्थव्यवस्था में लाभ मुख्य उद्देश्य है
(२) केंद्रीय अर्थव्यवस्था : -
इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में, सरकार द्वारा आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह से नियंत्रित और प्रबंधित किया जाता है। सामाजिक कल्याण इस अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है
(३) मिश्रित अर्थव्यवस्था : -
इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में, सरकारी और निजी क्षेत्रों द्वारा आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित और प्रबंधित किया जाता है
● अंतर
बाजार अर्थव्यवस्था, केंद्रीय आर्थिक, मिश्रित अर्थव्यवस्था .
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